Sunday, 2 August 2015

जीवन रहस्य - भाग 3



पिछले लेख में हम लोगो ने भौतिक जीवन के दुःखो के बारे में चर्चा किया था। हमने ये भी पाया कि कही न कही विश्वास के चलते हम अपने जीवन को व्यर्थ की उलझनों में डालते जा रहे है। हम उन घटनाओ के पीछे ज्यादा सोचते है जो की हमारे नियंत्रण में ही नहीं है जैसे अगर आपको यात्रा करनी है तो ड्राइवर पर भरोसा कर के आराम से सफर का मज़ा ले सकते है और अगर आपको ड्राइवर पर भरोसा नहीं है तो आप व्यर्थ की चिंता में पूरे सफर में फंसे रहेंगे। इसी तरह जो घटना तुम्हारे नियंत्रण में ही नहीं है उसे सोच कर भला क्या लाभ ?

रामचरित मानस में तो बहुत साफ शब्दों मे गोस्वामी तुलसीदास जी लिखते है :

हानि लाभ जीवन मरण , यश अपयश विधि हाथ। 

इसका अर्थ है कि उपरोक्त 6 वस्तुओ पर आपका कोई जोर नहीं है और ये परम पिता परमात्मा की इच्छा पर ही निर्भर है। यहाँ पर मै स्पष्ट कर दूँगा कि जिसे मै परम पिता परमेश्वर , ईश्वर, भगवन, श्री कृष्ण या श्री राम कहूँगा हो सकता है आप में कई लोग उसे कुछ अलग नामो से जानते हो जैसे प्रकृति, अल्लाह, जीसस , वाहे गुरु या किसी अन्य नाम से मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। अंततः हम किसी न किसी शक्ति के नियंत्रण में ही है यही सार बात है। आप जिस किसी में भी अपनी श्रद्धा या विश्वास रखते है कृपा करके उसे बनाये रखे।

श्रद्धा या विश्वास की बात आई है तो मई एक छोटा सा उदहारण देना चाहूंगा। एक सर्कस वाला व्यक्ति दो 80 फ़्लोर (मंजिल) वाली इमारतों के सबसे ऊपरी भाग में बीच में एक रस्सी बंधता है और उस पर बैलेंस (संतुलन) बना कर एक ईमारत से दूसरी ईमारत पर जाने का निश्चय करता है और देखने वाली भीड़ से पूछता है की क्या मई ये काम कर सकता हू सब जोर से कहते है "हाँ " , फिर वो अपने दो साथियो को कंधे पर बिठा कर उस रस्सी से एक ईमारत से दूसरे ईमारत तक पार कर के पहुँच  जाता है। उपस्थित भीड़ तालियों से उसे चीयर (अभिवादन) करती है।  अब वो कहता है कि भीड़ में से कोई व्यक्ति रस्सी पर चलने के दौरान उस पर बैठना चाहेगा तो सारी भीड़ में एक सन्नाटा सा छा  जाता है और कोई तैयार नहीं होता।

हमारी और आपकी श्रद्धा और विश्वास का यही हाल है। हम रोज ईश्वर के चमत्कारों और उसके बारे में पुराणो और ग्रंथो में पढ़ते  और सुनते है लेकिन जब खुद के यकीन की बारी आती है तो हमारा विश्वास  या श्रद्धा कही न कही कमजोर हो जाती है। इतना देखने , सुनने या जानने के बाद भी हम उस शक्ति या ईश्वर पर भरोसा नही कर पाते है। अगर हम उस परम शक्ति पर फुल 100 % भरोसा रखे तो हमारी लाइफ कितनी आनंद से भरी हो सकती है।  एक बार उस पर भरोसा कर के तो देखिये …!!!!!

हम आगे भी विचार विमर्श जारी रखेंगे फिर मिलेंगे तब तक के लिए

ॐ  शांति।
9892724426
arvind.trivedi79@gmail.com

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