हम सभी ने अभी कुछ दिनों पहले श्री कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव बहुत धूमधाम से मनाया। जैसा कि आप जानते हैं कि श्रीमती राधारानी के बिना हमारे श्यामसुंदर कभी पूर्ण नहीं हो सकते। आज श्री कृष्ण के आह्लादिनी शक्ति श्रीमती राधा जी का प्राकट्य दिवस है। भाद्रपद की शुक्लपक्ष अष्टमी के दिन ही राधाजी का इस धराधाम में प्राकट्य हुआ था। कहते है सोमवार के दिन था जब उनका प्राकट्य हुआ और संयोग से इस वर्ष राधाष्टमी सोमवार को ही आयी। यह बहुत ही पवित्र दिन है। ब्रम्हाजी ने इसका महत्व बताते हुए महान भक्त और वैष्णव श्री नारदजी से कहा कि इस दिन व्रत करने से मनुष्य कभी भी नरक का द्वार नहीं देखता है और लाखो एकदशी व्रत का पुण्य, लाखो गौए दान करने का पुण्य और लाखो गंगा स्नान का पुण्य प्राप्त होता है और साथ में उसे राधारानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
आइये हम सभी इस अखिल वन्दनीय श्री राधा नाम की कुछ तात्विक अर्थ समझने की चेष्टा करते है। वैसे तो उनके बारे में मेरी मति में कुछ भी समझने या सोचने की क्षमता नहीं है फिरभी जो कुछ भक्तो और वैष्णवो से प्राप्त हुआ हैं वही आपके साथ साँझा (शेयर) कर रहा हूँ। श्वेताश्वतर उपनिषद के अनुसार जो भी कोई कृष्ण राधा को दो मानता है या दो रूपों में देखता है वह नारायण की मूर्ति को दो भागो में खंडित करने का अपराध करता है। राधाजी सदा से ही श्री कृष्ण की आह्लादिनी शक्ति है और सदैव उनका ही रूप है ये सिर्फ लौकिक और माधुर्य लीला के लिए ही २ रूप में दिखाई देते है। वास्तव में तो वह उस परम पुरुष आदि नारायण की ही अभिन्न शक्ति है।
श्रीकृष्ण की भक्ति को प्राप्त करने वालो के लिए तो राधारानी का महत्व और बढ़ जाता है। इनके प्रसन्न होने से कृष्ण की भक्ति पाना सुनिश्चित हो जाता हैं। श्रीकृष्ण की माधुर्यलीला श्रीमती राधारानी के अपूर्ण है और बिना राधा कृपा से श्रीकृष्ण की कृपा पाना भी असंभव है। वैसे तो श्री भगवन की अनंत शक्तियाँ और अनंत हैं उनमे से तीन शक्तियाँ प्रमुख रूप से है।
1 . तटस्था शक्ति
2 . बहिरंगा शक्ति
3 . अंतरंगा शक्ति
हम सभी जीव जैसे देवता, मनुष्य, पशु, पक्षी, कीड़े-मकोड़े आदि श्रीभगवान की तटस्था शक्ति हैं और इस ब्रम्हांड में अपने किये कर्मो के अनुसार भिन्न भिन्न तरह के शरीरो में सुख और दुखो का अनुभव करता रहता है। माया के प्रभाव से ये जीवात्मा परमेश्वर से अपने संबंध को भुला बैठा है दुखी रहता है।
बहिरंगा शक्ति इस पूरे जगत को और ब्रम्हान्डो को नियंत्रित करने वाली शक्ति है। हम अपने आस-पास जो कुछ भी घटित होते देखते है जैसे सूर्य का निकलना, चन्द्र का निकलना, फसल पकना, फूलो का खिलना, नक्षत्रो और तारो की गति आदि अन्य भौतिक जगत की गतिविधिया ये सभी इसी बहिरंगा शक्ति के द्वारा ही संचालित होती है। इस शक्ति के और भी तीन प्रकार है - सत शक्ति, रज शक्ति और तम शक्ति।
अंतरंगा शक्ति के भी तीन प्रकार होते है। संगिनी शक्ति अर्थात आधार शक्ति , चित्त शक्ति अर्थात ज्ञान शक्ति और आह्लादिनी शक्ति। आह्लादिनी शक्ति ही श्रीराधा रानी स्वयं है। एक कथा के अनुसार श्री राधा जी के पिता वृषभानु जी वृन्दावन के पास रावलगांव में रहते थे। एक दिन प्रातःकाल यमुना स्नान के लिए गए तो उन्हें एक कमल के पुष्प पर एक स्वर्णकांति से युक्त एक कन्या नदी में बहती हुई अपनी और आती हुई दिखी। उस कन्या का तेज सूर्य किरणों से और भी अधिक आलोकित हो। उनके कोई संतान नहीं थी अतः उन्होंने उसे ईश्वर की कृपा समझकर उसको घर में लाकर उसको पालना शुरू कर दिया। कहते है श्री राधारानी की आँखे जन्म के समय बंद थी और जब कुछ समय बाद यशोदा जी कन्हैया को लेकर वृषभानु जी के घर आई तो उन्होंने पहली बार आँख श्री कृष्ण के सम्मुख ही खोली।
अतः जो भी श्री कृष्ण की कृपा को प्राप्त करना चाहते है उन सभी के लिए श्री राधा जी की कृपा परम आवश्यक है। राधा जी कृपा प्राप्त होते ही भक्ति के मार्ग में कोई अड़चन नहीं आती और भगवन नारायण अति शीघ्र प्रसन्न होते है।
आइये एक बार फिर श्री राधा जी के जन्मोत्सव की आप सभी को बधाई। जोर से बोलिए जय जय श्री राधे !
ॐ शांतिअंतरंगा शक्ति के भी तीन प्रकार होते है। संगिनी शक्ति अर्थात आधार शक्ति , चित्त शक्ति अर्थात ज्ञान शक्ति और आह्लादिनी शक्ति। आह्लादिनी शक्ति ही श्रीराधा रानी स्वयं है। एक कथा के अनुसार श्री राधा जी के पिता वृषभानु जी वृन्दावन के पास रावलगांव में रहते थे। एक दिन प्रातःकाल यमुना स्नान के लिए गए तो उन्हें एक कमल के पुष्प पर एक स्वर्णकांति से युक्त एक कन्या नदी में बहती हुई अपनी और आती हुई दिखी। उस कन्या का तेज सूर्य किरणों से और भी अधिक आलोकित हो। उनके कोई संतान नहीं थी अतः उन्होंने उसे ईश्वर की कृपा समझकर उसको घर में लाकर उसको पालना शुरू कर दिया। कहते है श्री राधारानी की आँखे जन्म के समय बंद थी और जब कुछ समय बाद यशोदा जी कन्हैया को लेकर वृषभानु जी के घर आई तो उन्होंने पहली बार आँख श्री कृष्ण के सम्मुख ही खोली।
अतः जो भी श्री कृष्ण की कृपा को प्राप्त करना चाहते है उन सभी के लिए श्री राधा जी की कृपा परम आवश्यक है। राधा जी कृपा प्राप्त होते ही भक्ति के मार्ग में कोई अड़चन नहीं आती और भगवन नारायण अति शीघ्र प्रसन्न होते है।
आइये एक बार फिर श्री राधा जी के जन्मोत्सव की आप सभी को बधाई। जोर से बोलिए जय जय श्री राधे !
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