Wednesday, 14 October 2015

नवरात्रि का हमारे जीवन में स्थान




इधर कुछ दिनों से व्यस्तता के कारण आप लोगो के संपर्क में नहीं रह सका। आपमें से काफी लोगो के फ़ोन कॉल्स भी आये जो आपका हमारे प्रति स्नेह को साफ़ प्रदर्शित करता है। इधर नौ दिवसीय शारदीय नवरात्र का प्रारम्भ हो चुका है। पूरे देश में लोग बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ इन दिनों देवी माँ का पूजन व अर्चन करते है। बहुत से लोग उपवास आदि के द्वारा अपना शुद्धिकरण करते है जिससे उपासना और अच्छी तरह से हो सके।

इधर गुजरात और महाराष्ट्र की तरफ गरबा नृत्य बहुत लोकप्रिय है। लोग रात्रि में माता की प्रतिमा के सामने घेरा बनाकर माता को रिझाने के लिए नृत्य और गायन करते है। इस सम्पूर्ण उत्सव को गरबा के नाम से जाना जाता है। उत्तर भारत में रात्रि जागरण का चलन ज्यादा है। लोग पूरी रात्रि जागकर माता जी के भजन आदि गाकर मैया को रिझाते है और उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास करते है। इसी तरह देश के अन्य अन्य भागो में भी लोग अपने अपने तरीके से इन नौ दिनों में मैया की विभिन्न तरीको से पूजा व वंदन करते है।

कलियुग के बढ़ते प्रभाव के फलस्वरूप आसुरी शक्तियों का दिन प्रतिदिन प्रभाव बढ़ता जा रहा है और आमजन त्रितापो से पीड़ित है। ऐसे में यदि कुछ समय ही सही , मनुष्य यदि भक्तिभाव से उस परमशक्ति संपन्न परमेश्वर को याद करता है तो परिणामस्वरूप बहुत ही शांति और आनंद का अनुभव करता है। अगर और अधिक गहराई से सोचे तो पाएंगे कि अनंत शक्तिरूपा माँ उन परम पुरुष आदि परमेश्वर की विभिन्न शक्तियों में से एक है। इन माँ के भी अनंत स्वरुप और अनंत शक्तियाँ हैं  जिन्हे हम जैसे मतिमंद नहीं समझ सकते है।

मैं किसी भी तरह के पूजापाठ का विरोधी नहीं हूँ लेकिन यदि हम इस प्रकार विशेष दिनों में पूजा करके अन्य दिनों में आसुरी या पापपूर्ण जीवन जिए या इसे सहन करे तो ये पूजा भी कोई फल प्रदान नहीं करती। अगर हम अपने जीवन में सदाचार, सत्य, प्रेम और करुणा जैसे सद्गुणों को विकसित नहीं करेंगे तो फिर जीवन में कैसे शांति और खुशहाली आ सकती है। आप लाख व्रत और उत्सव मना लो लेकिन जब तक हमारी अन्तः प्रवृत्तियाँ कलुषित है तब तक ये सभी कर्मकांड और समारोहो का कोई अर्थ नहीं है। हमारे शास्त्रो में भी वर्णन आता हैं  कि  जहाँ  जहाँ नारियों की पूजा होती हैं  वहाँ  वहाँ देवतागण स्वयं निवास करते है।

जब तक हम हमारे समाज में अपने आस-पास की स्त्रियों का आदर और सम्मान नहीं करेंगे तब तक हम अपने जीवन में सही अर्थो में कैसे नवरात्री का उत्सव मन सकेंगे। बढ़ती हुई कन्या भ्रूण हत्या, बढ़ती रेप की घटनाये, अल्प आयु कन्याओ के साथ दुर्व्यवहार की घटनाओ के बीच आज के समाज में घुटन का अनुभव हो रहा है। जब तक ऐसी घटनाओ पर लगाम नहीं लगेंगी तब तक माँ हमारे द्वारा अर्पित कोई भी पूजा या भेट स्वीकार नहीं करेंगी। हमारा देवी माँ से वरदान और खुशियो की आशा करना निरर्थक ही साबित होगा अगर हमारे समाज में हम स्त्रियों को सम्मान नहीं दे सके।

आइये इस नवरात्री हम सभी मिलकर संकल्प ले कि हम अपने आस-पास किसी भी तरह से महिलाओ के प्रति अपराध नहीं होने देंगे। सभी महिलाओ के प्रति आदर व सम्मान का भाव रखेंगे और जीवन में नौ सदगुणों को विकसित करेंगे। ये नौ सद्गुण इस प्रकार हैं - सत्य, सदाचार , क्षमा, प्रेम, करुणा, पवित्रता, समता,सहनशीलता और सेवा।

आज के लिए इतना ही बाकी फिर जल्द ही मिलते है।

ॐ शांति
9892724426
arvind.trivedi79@gmail.com

No comments:

Post a Comment