Wednesday, 28 October 2015

साधु पुरुष के कुछ लक्षण



हमें अक्सर हमारे घरों और स्कूल में यह सिखाया जाता हैं कि हमेशा अच्छे लोगो का संग करो। संगति का जीवन में बहुत महत्व होता है। हम जिन लोगो के साथ अपना समय व्यतीत करते है उनका प्रभाव हमारे स्वाभाव व जीवन पर बहुत अधिक गहरा होता है। हमें कुसंग से बचना चाहिये और हमेशा साधु पुरुषो का संग करना चाहिये अर्थात सत्संग का अवसर ढूंढ़ते रहना चाहिये। 

"सठ सुधरहि सत संगति पाही "

"एक घड़ी आधी घडी , आधी में पुनि आध।
तुलसी संगति साधु की, हरे कोटि अपराध।"

कुसंग के कारण ही महारानी कैकेयी क्या से क्या हो गयी थी। साधू पुरुष का संग पाकर रत्नाकर डाकू ब्रम्हज्ञानी हो गया और बालक ध्रुव ने मात्र ५ वर्ष की अवस्था में नारद मुनि के सत्संग से परम अटल पद और ईश्वर की कृपा प्राप्त की। ऐसे अनेको उदहारण हमारे वर्तमान जीवन में और इतिहास में देखने को मिलते है। यहाँ पर महत्वपूर्ण बात यह है कि साधु पुरुष की पहचान कैसे की जाय। किस तरह पहचाना जाए कि कौन साधु पुरुष है या कोई ढोंगी पुरुष है। यहाँ पर साधु पुरुषो के कुछ लक्षणों की चर्चा की जा रही है।

साधु पुरुष का प्रथम लक्षण होता है सहनशीलता। जी हाँ , सहनशील होना अपने आप में महान तप है। अगर आप सहनशील हैं तो आप बात बात पर क्रोधित नहीं होंगे जिसके परिणामस्वरूप आपकी बुद्धि ठीक ढंग से कार्य करेगी और आप जीवन में सही निर्णय करेंगे। अच्छे और बुरे दोनों में ठीक ढंग से अंतर कर पायेंगे।

दूसरा लक्षण है करुणामय होना। एक साधु पुरुष हमेशा ही करुणा से भरा होता है। ईर्ष्या और जलन  दुर्गुणों से बहुत दूर होता है ऐसा पुरुष। संसार में हर प्राणिमात्र के प्रति उसका मन सदैव ही करुणा और दया से भरा होता है और हमेशा लोक कल्याण के बारे में ही सोचता है। वह बिना स्वार्थ के ही दुसरो की भलाई के कार्यो में ही लगा रहता है।

साधु पुरुष का तीसरा महत्वपूर्ण लक्षण होता है समदर्शी होना। समदर्शी होने का अर्थ है सभी प्राणिमात्र के प्रति मित्रवत व्यवहार करना। दूसरे शब्दों में कहे की साधु का कोई भी शत्रु नहीं होता। वह सम्पूर्ण सृस्टि में सभी प्राणियों के प्रति कभी भी भेदभाव नहीं करता। वह ब्राम्हण, चाण्डाल , ज्ञानी और मूर्ख  में कोई भेदभाव नहीं करता।

साधु पुरुष का एक महत्वपूर्ण लक्षण है कि वह अपना जीवन प्रामाणिक ग्रंथो जैसे गीता, श्रीमदभागवत और रामचरित मानस आदि के अनुसार जीता है। उसका जीवन शांतिपूर्ण होता है और भौतिक जीवन के तनावपूर्ण और दिखावे के जीवन से बहुत दूर होता है।

साधु पुरुष अपने मानव जीवन के परम लक्ष्य के प्रति हमेशा से ही सचेत रहता है और आध्यात्मिक चिंतन को जीवन में अधिक महत्व देता है। जैसा कि आप को पता ही होगा मानव जीवन का परम लक्ष्य अपने सम्बन्ध को ईश्वर के साथ पहचान लेना और उस परम सत्य स्वरुप ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण ही है।

साधु पुरुषो के और भी कई लक्षण होते है।  यहाँ पर कुछ प्रमुख लक्षणों को बताया गया है। अगर आप में से कोई और साधु पुरुष के लक्षणों में कुछ जोड़ना चाहे तो आपका स्वागत है। पुनः अतिशीघ्र मिलते है।

ॐ  शान्ति
9892724426
arvind.trivedi79@gmail.com

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