Wednesday, 29 July 2015

जीवन रहस्य - भाग १

जीवन रहस्य - भाग १

कल हम लोग भौतिक जीवन के बारे में चर्चा कर रहे थे। हमारा जीवन दो प्रकार का होता है , पहला भौतिक जीवन और दूसरा आध्यात्मिक जीवन। उसी बात को आगे बढ़ाते हुए आज हम भौतिक जीवन पर कुछ और विस्तार से चर्चा करेंगे। जीवन के बारे में बहुत प्राचीन समय से हमारे विद्वानो, मनीषियों और दार्शनिको ने बहुत गहराई से सोचा और अपने विचार हमारे सामने रखे। किसी को ये जीवन पहेली लगा, तो किसी को एक सुहाना सफर लगा, किसी को ये दुनिया रंगमंच लगी तो किसी को ये दुनिया समझ में ही नहीं आई। हमारे गीतकारों और कवियों  ने भी इस जीवन के ऊपर बहुत कुछ लिखा। इनमे से कुछ फिल्मो के गीतों की पंक्तियां आपके सामने प्रस्तुत है :

ज़िंदगी एक सफर है सुहाना , यहाँ कल क्या हो किसने जाना।

जिंदगी कैसी है पहेली हाय, कभी ये हँसाये कभी ये रुलाये।

जब तक मैंने समझा जीवन क्या है , जीवन बीत  गया …!!!

जिंदगी के सफर में गुजर जाते है जो मुकाम , वो फिर नहीं आते।

जिंदगी प्यार का गीत है, इसे हर दिल को गाना पड़ेगा  ....

जिंदगी है खेल कोई पास कोई फेल , खिलाडी है कोई अनाड़ी  है कोई  ।



इस तरह अनेको गीतों की रचना हुई सभी लोगो ने अपने तरीके से जीवन को समझने को कोशिश की। इस तरह बहुत विचार हुआ जीवन पर और आज भी ये मंथन जारी है। जितने लोग उतनी बाते , लेकिन एक निष्कर्ष पर सभी लोग आज तक नहीं पहुंच पाये। हमारे सामने ये सवाल है की आखिर जीवन जिए तो कैसे जिए , इसका क्या उद्देश्य है ? एक बात तो साफ़ निकल कर आती है कि  इस जगत में कुछ भी परमानेंट यानि हमेशा के लिए नहीं है। चाहे वो हमारा शरीर हो या हमारे आस पास की वस्तुऍ , सभी एक सीमित समय या काल तक रहती है और फिर नष्ट  हो जाती है। आप थोड़ा गहराई और शांत मन से विचार करिये कि  क्या आपके आसपास ऐसी कोई वस्तु या व्यक्ति है जो हमेशा  के लिए है ? अगर है तो मुझे भी बताइये। मैंने तो आज तक ऐसा कुछ भी नहीं पाया या देखा जो परमानेंट यानि हमेशा रहे।

अब ये आश्चर्य की बात है कि  नहीं , कि  हम फिर भी इतना चिन्ताओ से भरा जीवन जीते जा रहे है। डर डर के भय और ईर्ष्या से भरा जीवन जिए जा रहे  है।  हमें ये   मालूम है कि कोई भी वस्तु का अस्तित्व हमेशा के लिए नहीं है फिर भी हम हर पल चिंता और तनाव में जी रहे है ये हमारी बेवकूफी नहीं तो और क्या है ?  चाहे जैसी परिस्थिति हो कल वो नहीं रहेगी अच्छी हो या ख़राब  तो फिर किस बात का सुख और किस बात का दुःख ? बेहतर होगा की हम अपने आप में जिए अपने आनंद में जिए और मानवीय गुणों के साथ जिए। अपनी वास्तविक पहचान करिये और परम आनंद में जिंदगी जिए।

हम फिर से आगे अपने विचारो के साथ आपके साथ फिर उपस्थित होंगे।



ॐ शांति।।
9892724426
arvind.trivedi79@gmail.com

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