प्रिय पाठको ,
आप सभी को हनुमान जयंती की कोटि कोटि शुभकामनाये। भगवान श्रीरामचन्द्र जी के अनन्य और शास्वत सेवक हनुमान जी का चरित्र हम सभी के लिए बहुत प्रेरक है। हनुमान जी के बारे में कुछ लिखने का अर्थ होगा सूर्य को दीपक दिखाना। आइये आज इस पवित्र अवसर पर हम लोग हनुमान जी के जीवन से जुड़े कुछ चरित्रों की चर्चा करते है।
वैसे तो हनुमान जी शिव जी के अंश अवतार है। इस भौतिक जगत में माता अंजनि को मातृ सुख प्रदान किया। बचपन में हनुमान चंचल और नटखट प्रकृति के थे जिस कारण एक ऋषि के शापवश वे अपना बल भूल गए थे। जिसे समय आने पर उन्हें गया। अपने जन्म के कुछ दिन बाद ही उन्होंने एक बार सूर्य को एक फल समझ कर निगल लिया था। इनके बल , पराक्रम, ज्ञान आदि के बारे में क्या कहना। इन्होने एक से बढ़कर एक अतुलित और आश्चर्य भरे दुर्गम काज किये।
इनमे से कुछ कार्य प्रमुख है जैसे सौ योजन का समुद्र पार करना, माता सीता का पता लगा कर स्वर्णमयी लंका को जलाना, संजीवन बूटी रातो - रात ही ले आना और अहिरावण को मारकर श्री राम और लक्ष्मण को पाताल लोक से जीवित बचा कर लाना। श्री हनुमान जी प्रभु श्री राम जी की सेवा के लिए सदैव तैयार रहते थे। उन्होंने सदैव निष्काम भाव से प्रभु श्री रामचन्द्र की सेवा की और बदले में कुछ भी नहीं चाहा शिवाय एक भक्ति को छोड़कर।
हनुमान जी ने वानरराज सुग्रीव को भगवन राम से मित्रता करवाकर खोया हुआ राज्य पुनः वापस दिलवाया। भक्त विभीषण को भी श्री राम जी से मिलवाने में मदद की। मित्रो, हनुमान जी की कृपा प्राप्त करके हम लोग भी भगवान की भक्ति सुगमता से प्राप्त कर सकते है। हनुमान जी अष्ट सिद्धियो और नौ निधियों को भी प्रदान करने वाले है। भुत, पिसाच आदि बाधाये तो हनुमान नाम सुनकर भाग जाती है।
हनुमान जी को सदा अमरता और चिरयौवन का वरदान मात सीता जी से प्राप्त है। हनुमान जी अति विनम्र और दयालु भी है। इतने सद्गुण और बल के बावजूद भी वे सदा ही रघुपति के चरणों में सदा ही सेव करते रहते है। उन्हें राम नाम अति प्रिय है। वे निरन्तर ही राम नाम का सुमिरन और जाप में निमग्न रहते है। जहां कही भी प्रभु श्री राम की लीला और कथाओं का गान होता है , वहाँ हनुमान जी सदैव विराजमान रहते है।
भगवद प्राप्ति का मार्ग श्री हनुमान जी की कृपा से ही मिल सकता है अतः चाहे भौतिक उन्नति हो या आध्यात्मिक श्री हनुमान जी सभी सिद्धियो के प्रदाता है।
और देवता चित्त न धरहि , हनुमत सेइ सर्व सुख करहि।
संकट कटै मिटै सब पीरा , जो सुमिरै हनुमत बल बीरा।
मित्रों श्री हनुमान जी का चरित्र अनन्त है और उनकी महिमा का गान हमारे वश की बात नहीं है। अंत में मैं श्री हनुमान जी से विनती करता हुँ कि वे सदैव अपनी कृपा दृष्टि हम सभी के जीवन में बनाए रखे और भगवान से हमें मिलाने में साहयता प्रदान करे और प्रभु के चरणों में नित प्रतिदिन प्रीति बढ़े।
ॐ शांतिआप सभी को हनुमान जयंती की कोटि कोटि शुभकामनाये। भगवान श्रीरामचन्द्र जी के अनन्य और शास्वत सेवक हनुमान जी का चरित्र हम सभी के लिए बहुत प्रेरक है। हनुमान जी के बारे में कुछ लिखने का अर्थ होगा सूर्य को दीपक दिखाना। आइये आज इस पवित्र अवसर पर हम लोग हनुमान जी के जीवन से जुड़े कुछ चरित्रों की चर्चा करते है।
वैसे तो हनुमान जी शिव जी के अंश अवतार है। इस भौतिक जगत में माता अंजनि को मातृ सुख प्रदान किया। बचपन में हनुमान चंचल और नटखट प्रकृति के थे जिस कारण एक ऋषि के शापवश वे अपना बल भूल गए थे। जिसे समय आने पर उन्हें गया। अपने जन्म के कुछ दिन बाद ही उन्होंने एक बार सूर्य को एक फल समझ कर निगल लिया था। इनके बल , पराक्रम, ज्ञान आदि के बारे में क्या कहना। इन्होने एक से बढ़कर एक अतुलित और आश्चर्य भरे दुर्गम काज किये।
इनमे से कुछ कार्य प्रमुख है जैसे सौ योजन का समुद्र पार करना, माता सीता का पता लगा कर स्वर्णमयी लंका को जलाना, संजीवन बूटी रातो - रात ही ले आना और अहिरावण को मारकर श्री राम और लक्ष्मण को पाताल लोक से जीवित बचा कर लाना। श्री हनुमान जी प्रभु श्री राम जी की सेवा के लिए सदैव तैयार रहते थे। उन्होंने सदैव निष्काम भाव से प्रभु श्री रामचन्द्र की सेवा की और बदले में कुछ भी नहीं चाहा शिवाय एक भक्ति को छोड़कर।
हनुमान जी ने वानरराज सुग्रीव को भगवन राम से मित्रता करवाकर खोया हुआ राज्य पुनः वापस दिलवाया। भक्त विभीषण को भी श्री राम जी से मिलवाने में मदद की। मित्रो, हनुमान जी की कृपा प्राप्त करके हम लोग भी भगवान की भक्ति सुगमता से प्राप्त कर सकते है। हनुमान जी अष्ट सिद्धियो और नौ निधियों को भी प्रदान करने वाले है। भुत, पिसाच आदि बाधाये तो हनुमान नाम सुनकर भाग जाती है।
हनुमान जी को सदा अमरता और चिरयौवन का वरदान मात सीता जी से प्राप्त है। हनुमान जी अति विनम्र और दयालु भी है। इतने सद्गुण और बल के बावजूद भी वे सदा ही रघुपति के चरणों में सदा ही सेव करते रहते है। उन्हें राम नाम अति प्रिय है। वे निरन्तर ही राम नाम का सुमिरन और जाप में निमग्न रहते है। जहां कही भी प्रभु श्री राम की लीला और कथाओं का गान होता है , वहाँ हनुमान जी सदैव विराजमान रहते है।
भगवद प्राप्ति का मार्ग श्री हनुमान जी की कृपा से ही मिल सकता है अतः चाहे भौतिक उन्नति हो या आध्यात्मिक श्री हनुमान जी सभी सिद्धियो के प्रदाता है।
और देवता चित्त न धरहि , हनुमत सेइ सर्व सुख करहि।
संकट कटै मिटै सब पीरा , जो सुमिरै हनुमत बल बीरा।
मित्रों श्री हनुमान जी का चरित्र अनन्त है और उनकी महिमा का गान हमारे वश की बात नहीं है। अंत में मैं श्री हनुमान जी से विनती करता हुँ कि वे सदैव अपनी कृपा दृष्टि हम सभी के जीवन में बनाए रखे और भगवान से हमें मिलाने में साहयता प्रदान करे और प्रभु के चरणों में नित प्रतिदिन प्रीति बढ़े।
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