मित्रों इधर पिछले एक-दो महीनो से बहुत व्यस्त था इसलिए आप लोगो से कोई संपर्क नहीं हो सका। आप सभी नियमित पाठको के मेल और मैसेज प्राप्त होते थे। आप सभी का बहुत शुक्रिया मुझे याद करने के लिए। आप सभी को गीता जयंती की हार्दिक शुभकामनाये पहुंचे। पिछले २१ दिसंबर को एकादशी तिथी थी और उसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपने परम भक्त और सखा पाण्डु पुत्र अर्जुन को गीता का उपदेश धर्मक्षेत्र के नाम से विख्यात कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान में दिया था।
अगर गहराई से चिंतन करे तो श्री कृष्ण जी का ये उपदेश सिर्फ अर्जुन के लिए ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण मानव समाज के लिये था। आज जो विश्व इतनी समस्याओ से जूझ रहा हैं और दिन प्रतिदिन हमारा जीवन निराशा और तनाव के चंगुल में बुरी तरह आता जा रहा है इसकी मुख्य वजह वास्तविक ज्ञान और परमेश्वर से अपने सम्बन्ध का विस्मरण। सनातन धर्म में इतनी विशाल संख्या में वेद, पुराण, उपनिषद् आदि को इस छोटे से संघर्ष और कलह के युग में समझ पाना लगभग असंभव हैं और इसी वजह से हम पर करुणा करके परमेश्वर ने हमको यह दिव्य ज्ञान प्रदान किया। हमे इसका भरपूर लाभ उठाना चाहिये।
इसका भरपूर लाभ उठाने के लिए इस श्री मदभग्वदगीता का नित्य प्रतिदिन कम से कम एक श्लोक का अर्थ सहित तात्पर्य समझने की कोशिश करना चाहिए। आप भी पढ़े और दुसरो को भी इस ग्रन्थ को पढ़ने के लिए प्रेरित करे। ज्यादा से ज्यादा लोगो तक अगर हम इस दिव्य ज्ञान को पहुँचा सके तो ये हमारी मानव समाज के प्रति परम सेवा होगी. इसके ज्ञान से ही मनुस्य भय, शोक, निराशा, तनाव और दुःखो के जाल से सफलतापूर्वक निकल सकता है।
गीता में मुख्यतः कर्मयोग, ध्यानयोग और भक्तियोग की चर्चा विस्तार से हुई है। इसके अलावा प्रकृति , काल, जीव, परमात्मा और कर्म के प्रकारों पर भी बहुत ही गहरा दर्शन और ज्ञान प्रदान किया गया हैं। ये ज्ञान बहुत ही दुर्लभ और दिव्य है इसे समझने की यथासंभव कोशिश करे और अगर कोई विद्वान और भक्त के मुख से इसे सुने तो और अधिक सरलता से इसे समझ सकते है।
और एक मुख्य बात कि बिना परमेश्वर की कृपा से इसे समझना असंभव हैं तो उस परमेश्वर की कृपा प्राप्त करने के लिए सोलह अक्षर का महामंत्र का नित्य जाप करे।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण , कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम , राम राम हरे हरे।
एक बार आप सभी को पुनः गीता जयंती के पवन अवसर पर हार्दिक बधाई। ईश्वर की कृपा आप सभी को प्राप्त हो ऐसी मेरी प्रार्थना है। अगर आप में से प्रश्न पूछना है तो हमसे संपर्क कर सकते है।
ॐ शांति
अरविन्द त्रिवेदी
9892724426
arvind.trivedi79@gmail.com
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